Monday, June 14, 2010

फिनाल इयर को विदाई

कुछ कहना छह रहाहूँ ।
सर आपके बारे मैं।
अगर कुछ गलती हो जाये।
तो दल देना कबारे मैं।

हमको आपने बहुत कुछ सिखाया ।
पर लड़कियों ने भी आपको असली पथ पदाया।
हमको समझाया की फंटू न बनाना
वह बाबूजी वाह! खुद बड़ी मैं कन्यायें घुमाना।

एसा कुछ सुना है
सर आपके बारे मैं
अगर कुछ गलती हो जाये
तो दल देना कबारे मैं।

आपकी वो बातें वो टी आई सी छोटी पर मुलाकातें
कहना अच्छा काम नहीं किया तो खाओगे लातें
लेकिन दिल मैं कुछ और ही छुपाना
वाह बाबूजी वाह! याद आएगा ये जमाना।

एसा कुछ सुना है
हमने आपके बारे मैं
अगर कुछ गलती हो जाये
तो दाल देना कबारे मैं।

आपकी वो चंचल मुस्कराहट
लड़कियों के लिए आपके दिल मैं आहत
आपका वो हमारे लिए देदी केसन
सर मिला है आपसे घर का जैसा अ फेक्सन।

कुछ एसा सुना हैं
हमने आपके बारे मैं
अगर कुछ गलती हो जाये
तो दाल देना कबारे मैं।

1 comment:

  1. these are the few lines
    of that long poem
    whichy i had written for our final year sirs

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