Saturday, May 15, 2010

VEER RAS

अकेले चलने का साहश है मुझमें ,
अँधेरी गलियों मैं घुमा हूँ मैं,
कायरता की बात मत कर ये दोस्त,
तूफानों झंझावातों से खेला हूँ मै.
खतरों से खेलना फितरत है मेरी,
लहरों से खेलूँ ये किस्मत है मेरी
द्रिंड संकल्पी पहलवान हूँ मैं,
मानवता का प्रतीक सोच का कर्म प्रधान हूँ मैं।
अकेले चलने का साहश है मुझमें
अँधेरी गलियों मैं घुमा हूँ मैं।
मतवाली सोच है मेरी
किसी का नहीं, गुलाम हूँ मैं
बढता चलता हूँ मजिल की ओर
निर्भयता का भंडार हूँ मैं।
अकेले चलने का साहस्य्ह है मुझमें
अँधेरी गलियों मैं घुमा हूँ मैं।



Monday, May 3, 2010

my love

Is it really true our love is over now?..............
Can it be time for us to say goodbye?...........
Too soon, it’s much too soon, my love, for me;.............
smile with ease, but I can only sigh..............